आज शिर्डी गया था बाबा के दर्शन किये पर भीड़ बहत थी और बाबा भी बिजी थे,aur हो भी क्यों ना जब मेरे जैसे जाने कितने लाखो करोडो भक्त उनको हमेशा याद और पूजा में लगे जो रहते हैं. पर बाबा वहां आनेवाले किसी की भी अनदेखी नहीं करते और सबकी सुनते हैं  और उनकी फरियादें अपने ” to do ” लिस्ट मैं लिख लेते हैं.सुबह सुबह  ये दर्शन अछा रहा. फिर मैंने अपने कंप्यूटर ओं किया और कम पे लग गया.आप घबराये मत क्यों की मैं मन मैं और खयालो मैं ही शिर्डी चला गया था मेरा पार्थिव शारीर तो यहीं छुट गया था.क्या जरुरी है की मैं अपना ३० साल का गन्दा बदन लेके ही जून.मेरा मन तो जा सकता है ना बाबा से मिलने और उनका दर्शन करने तो मैं कर आया.बाबा ने भी मुझे देखा और आशीष दिया. आप लोग कुछ भी कहो …बाबा की जय हो …

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