बिछड्के तुझसे रोता तो आंसू कम पड़े
टुटा हूँ कुछ ऐसे सँभालने को ज़िंदगी ही कम पड़े
मुस्कुराता हूँ इन रास्तों मे जहाँ तेरा साया नसीब न हुआ
ज़िंदगी तो बदनसीब थी मैं मौत को भी न चुन सका
बिछड्के तुझसे रोता तो आंसू कम पड़े
टुटा हूँ कुछ ऐसे सँभालने को ज़िंदगी ही कम पड़े
मुस्कुराता हूँ इन रास्तों मे जहाँ तेरा साया नसीब न हुआ
ज़िंदगी तो बदनसीब थी मैं मौत को भी न चुन सका
Categories: SHER-O-SHAYARI
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