May 22, 2008...4:00 PM

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इश्क मैं हर दर्द से रूबरू हुए हमआँखों की गहराई से अस्कों की सैलाब से वाकिफ भी हुए हम

कहते अगर प्यार इसको … तो शायद कुछ अपना भी है गम

इस कदर तरसे प्यार मैं के जिंदा रहके भी मौत को तरसे हम

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