इश्क मैं हर दर्द से रूबरू हुए हमआँखों की गहराई से अस्कों की सैलाब से वाकिफ भी हुए हम
कहते अगर प्यार इसको … तो शायद कुछ अपना भी है गम
इस कदर तरसे प्यार मैं के जिंदा रहके भी मौत को तरसे हम
इश्क मैं हर दर्द से रूबरू हुए हमआँखों की गहराई से अस्कों की सैलाब से वाकिफ भी हुए हम
कहते अगर प्यार इसको … तो शायद कुछ अपना भी है गम
इस कदर तरसे प्यार मैं के जिंदा रहके भी मौत को तरसे हम